The story of Karva Chauth
by richa
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The story of Karva Chauth
• व्रत और भूख: प्राचीन काल में वीरावती नाम की एक सुहागिन ने अपने पति की लंबी उम्र के लिए कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को निर्जला (बिना जल और अन्न के) व्रत रखा। • भाइयों का प्रेम: वीरावती के सातों भाइयों को अपनी बहन की भूख-प्यास और कमज़ोर चेहरा देखा नहीं गया। भाइयों ने मिलकर एक पेड़ की आड़ में पीपल के पत्ते की छलनी से एक दीपक जलाकर नकली चांद जैसा दृश्य दिखाया। • व्रत टूटना और संकट: वीरावती ने उसे असली चांद समझकर अर्घ्य दिया और भोजन करने बैठ गई। जैसे ही उसने पहला निवाला तोड़ा, उसमें
• व्रत और भूख: प्राचीन काल में वीरावती नाम की एक सुहागिन ने अपने पति की लंबी उम्र के लिए कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को निर्जला (बिना जल और अन्न के) व्रत रखा। • भाइयों का प्रेम: वीरावती के सातों भाइयों को अपनी बहन की भूख-प्यास और कमज़ोर चेहरा देखा नहीं गया। भाइयों ने मिलकर एक पेड़ की आड़ में पीपल के पत्ते की छलनी से एक दीपक जलाकर नकली चांद जैसा दृश्य दिखाया। • व्रत टूटना और संकट: वीरावती ने उसे असली चांद समझकर अर्घ्य दिया और भोजन करने बैठ गई। जैसे ही उसने पहला निवाला तोड़ा, उसमें बाल निकला और पति
• व्रत और भूख: प्राचीन काल में वीरावती नाम की एक सुहागिन ने अपने पति की लंबी उम्र के लिए कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को निर्जला (बिना जल और अन्न के) व्रत रखा। • भाइयों का प्रेम: वीरावती के सातों भाइयों को अपनी बहन की भूख-प्यास और कमज़ोर चेहरा देखा नहीं गया। भाइयों ने मिलकर एक पेड़ की आड़ में पीपल के पत्ते की छलनी से एक दीपक जलाकर नकली चांद जैसा दृश्य दिखाया। • व्रत टूटना और संकट: वीरावती ने उसे असली चांद समझकर अर्घ्य दिया और भोजन करने बैठ गई। जैसे ही उसने पहला निवाला तोड़ा, उसमें
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